जो इन्सानों पर गुज़रती है ज़िन्दगी के इन्तिख़ाबों में / पढ़ पाने की कोशिश जो नहीं लिक्खा चँद किताबों में / दर्ज़ हुआ करें अल्फ़ाज़ इन पन्नों पर खौफ़नाक सही / इन शातिर फ़रेब के रवायतों का  बोलबाला सही / आओ, चले चलो जहाँ तक रोशनी मालूम होती है ! चलो, चले चलो जहाँ तक..

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23 April 2009

माफ़ करियेगा बीच मे कूद रहा हू.

Technorati icon
आज कट-पेस्टीय तकनीक से एक लँबी पोस्ट लिखने का जुगाड़ लग गया ! हमारे क्लास टीचर श्री अनूप शुक्ल जी कहते हैं.. वह हमरा लिखा बूझ नहीं पाते !  गुरु, आप कभी ऎसे अनाड़ी तो न थे.. ही ही

तो.. कट-पेस्टीय तकनीक से लँबी पोस्ट का जुगाड़..क्या मैं छायावादी कहलाऊँगा यदि मैं इसकी तुलना भारतीय राजनीतिज्ञ से करूँ, तो ? हमें टिप्पणी चाहिये.. और उन्हें वोट ! हमने भी जहाँ अलाव जलती देखी, लपक कर हाथ सेंक लिये,  बस फ़र्क़ इतना है, कि  वह पहले आग लगा देते हैं,  बाद में  हाथ सेंकते हैं
हाँ, अलबत्ता मुद्दे उठाने की कट पेस्ट में हम दोनों ही ईमानदार हैं, वह मुद्दों की वोट वैल्यू हेरते फिरते हैं, और हम कमेन्ट वल्यू ! अरे, बस दो मिनट में एक पोस्ट का जुगाड़ भाँप कर आया था, उल्टे मैं अपना खुद का ही लिखने लग पड़ा ? बस यही फ़र्क़ है, हममें और उनमें.. वह याने के नेता जी अवामखोरी करके फल फूल सकते हैं, और हम हरामखोरी करके चैन से जी  भी नहीं पाते !   मुई आत्मा कचोटने लगती है, उनका क्या ? वह तो पहले ही अपने हृदय परिवर्तन की घोषणा करके पार्टी में आते हैं, पालिटिक्स खेलते हैं, और इस प्रकार जनता के कष्टों का सतत उद्धार होता रहता है ! यही राजनीति का नियम है । ब्लागिंग का नियम क्या होता है,  आगे कभी यह भी खोजेंगे !
आर्रे धुत्त ! कुछ नहीं, आप पोस्ट पढ़ते जाइये, निट्ठल्ला डिस्टर्ब करने का प्रयास कर रहा था । यही तो होता है , कुछ भी अच्छा करने चलो ये निट्ठल्ले छींक देते हैं ! अब ई सब बात का पूछने का क्या तुक, कि नेता राजनितियै काहे करता है, उनको जनता-नीति करने का कउन सा परहेज ?

अब निट्ठल्ला अँग्रेज़ी बूझने का काबलियत रखता त उसको समझा देते, रे बुरबक भूखी प्यासी कलपती जनता, तू अपने “ परित्राणानाम या  साधुनामों “ का तमाशा देख, तू अभागा इसी के लिये जन्मा है ! समझ होती .. कोई तुम्हें जनवासे में जयमाल से पहले ही समझा देता, कि लल्लू जी
 
 
“ Before you marry, you must know the bride well !’
Divorce is a painful dent in One’s experiences with the life !”

आप लोग सोच रहे हैं, कि आज डाक्टर ने फिर दिखाया मदारी का खेल ! तब से मेहरबान कद्रदान किये जा रहा है,  कूदना है तो कूद.. दुवन्नी की टिप्पणी ले और फूट ! तब से जनता.. अवामखोरी… आत्मा.. का कबाड़ सब ईहाँ  फैलाये पड़ा है । सीधे से अपना “ कट – पेस्ट दिखा और जो भी मामला है, नक्की कर ! निट्ठल्ला सबका टाइम खोटी किया करता है, कबाड़ी कहीं का ! ठीक है, भाई हम अपना ही घर फूँक लेते हैं ।

ठीक तो है.. नक्सलियों को नाहक ही क्यों तक़लीफ़ दिया जाय ? जनता होय या नेता होय .. राष्ट्रीय नारा यही होना चाहिये..  “ आओ अपना घर बारि दें ।“    लगता है, कि मैं सीरियस हो रहा हूँ..  चँडूखाने की बातें करने का अपना अलग ही मजा है.. पर एक मैं हूँ, कि सीरियस हो रहा हूँ !  ब्लागिंग क्या  खाक  होगी ?  

कल एक ठियाँ स्वयं को प्रस्तुत कर दिया.. “ लेयो पुरजापति जी, हमका दुई जूता मारि लेयो.. तनि हमारे झँडवा का शान रखो ! ठीक है, बिलैती भशा में कम्पूटरगिरी करते हो.. लेकिन  दुनिया को दिखाने भर को सही .. .. “ झँडा ऊँचा रहे हमारा ..”  के सुर में सुर तो मिलाओ !  चल भाई, तू बेसुरा सही.. सरम आती है, त तनि लिप मूवमेन्ट ही देते रहो… भले महतारी का गरियायो ! जईसे हमरी महतारी.. वईसे तुम्हरी भी महतारी ! जोर से बोलो जै माता दी… सारे बोलो धत्त माता की..    जय ब्लागिंग हुर्र माता की..  क्या यार ?



बतावत हैं, कि Bottom का मतलब ऊप्पर को होता है..  हमरी उल्टी भाषा की जानकारी छिन भर मा हन्डेड एट्टी डिग्री पर घूमि कै सीधी होय गई ,  क्या यार ?  वैसे पुरजापति जी, आपने मेरा काम आसान कर दिया.. अब हम फ़ुल कान्फ़िडेन्स से किसी भी मरीज़ को मार  सकेंगे.. ना ना जान नहीं लेंगे.. बेजान मुल्क की जनता में अब जान ही कितनी बची है ? बस सामने मरीज़ के लेटते ही  घोषित कर देंगे.. “ यह तो गया काम से.. ?  ख़ल्लास !  यह तो मेरे इलाज़ से पहले ही  मर चुका है !  कोई माई का लाल, जरा ऎतराज़ करके तो  देखे  ?  आपने रास्ता दिखाय दिया.. यानि आज से आप हमारे  28 वें गुरु के पद पर आसीन हुये !

XXXXXXXXचल भाई,  ईहाँ जो Bottom लिक्खा है, उसे हम अप् समझ लेते हैं, सलाम न करेंगे, नतमस्तक तो होने दोगे  ?  नहीं, नतम्स्तक तो दुनिया आपके सामने होगी.. हम शीर्षासन कर तिरंगे को सलाम कर लेते हैं ! 

तो..  पुरजापति जी, आपने मेरा काम कितना आसान कर दिया..  अब हम फ़ुल कान्फ़िडेन्स से किसी भी मरीज़ को मार  सकेंगे.. ना ना जान नहीं लेंगे.. बेजान मुल्क की जनता में अब जान ही कितनी बची है ?

बस सामने मरीज़ के लेटते ही  घोषित कर देंगे.. “ यह तो गया काम से.. ?  ख़ल्लास !  यह तो मेरे इलाज़ से पहले ही  मर चुका है !  कोई माई का लाल, जरा ऎतराज़ करके तो  देखे  ? एक डिफ़ेक्ट कर जाये तो बात और है,  वरना .. पाँच में से हमारे चार कम्पाउँडर यानि की बहुमत उसे दौलताबाद तक दौड़ा लेगा,
“ डाक्टरी के सिरके में डूबे हुये  इत्ते  बड़े असली पुराने  डाक्टर साहब  झूठ  थोड़े ही बोलेंगे ? हमारे सर जी  कहते हैं , तो मानना  पड़ेगा कि तुम्हरा मरिज़वा टें हो चुका है, वैसे भी जीते जी मर ही रहा था, बेचारा  ! 

जानकारी मिलते ही हमारे मित्र लोगों ने खट से कई धारायें तलाश लीं..,  हुण मान्गये  नापित नाल कनून दे  लँबे नुस्खे हुँदे हण !  अँतिम ख़बर मिलने तक यह सँख़्या छः हो चुकी है । हम आज सुबह ही, आपके टिप्पणी बक्से को यह सूचना दे चुके हैं ! और मेल आई. डी. बटोरने वाले डिस्कुस जी को भी सूचना प्रेषित कर दी है । चिट्ठाचर्चाकारों से चिढ़े हुये हो, या फिर एक औरत ने ऎतराज़ क्या दर्ज़ कर दिया, इसलिये हलाकान हो गये ! और देखो जरा, इतने पर भी हम तुम्हें फ़ोक़ट में पूरी पब्लिसिटी दे रहे हैं कि नहीं ?



niramalaa  ke kadmo tale हमको तो धक्का तब लगा, जब  तिरँगे  की अवमानना पर  आई आई टी, चेन्नई से निकले एक आलिम फ़ाज़िल भाई  अपनी वेबसाईट पर यह  लिखते  हैं “ यदि ऎसा ही कोई मुसलमान करता, तो उसे देशद्रोह, अलगावबाद, और आतंकवाद जैसे जाने किन किन आरोपों से घेर लिया जाता ।“ मतलब साफ़ है, यानि कि अपने तिरँगे   का सम्मान मुस्लिम भले ही न करें, पर किसी न किसी ख़ौफ़ से डरते तो हैं ! अब लेयो ?

सुना है, ब्लागिंग अपने विरोध को दर्ज़ करने  का प्रभावशाली माध्यम है, पर मेरे नये नवेले मित्र, गौतम जी
इसे बेवज़ह विवाद समझते हैं ! तभी मेरे कीबोर्ड से बुड्ढीजीवी शब्द का अविष्कार हो गया ! अपने को बचा कर चलने की ज़रूरत तो है । पर, बेजारगी से भरी लाचार आभिव्यक्ति ? पर  हिन्दी ब्लागर पर ऎसे जन भी हैं, जो यह कहते पाये जाते हैं कि


 
कभी कभी तो मुझे तू निराश करता है,
मेरे वजूद में खुद को तलाश करता है.
मैं तो नूर साहब की लाइनों में कतरे का वज़ूद तलाश ही रहा । इन्हें कहाँ से मेरा हौसला भी दिख गया
मैं होश में हूँ हजारों कटार के आगे,
तुम्हारे हाथ का कंकड़ निराश करता है                       



19 टिप्पणी:

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey का कहना है
This comment has been removed by the author.
ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey का कहना है

मेरी पोस्ट का लिंक गड़बड़ है। कट-पेस्ट प्रॉपर्ली नहीं हुआ। कृपया ठीक कर लें! :-)

डॉ .अनुराग का कहना है

वैसे फुरसतिया जी बात में दम है गुरुदेव ......आपकी पोस्ट समझने के लिए समझ का स्तर भी थोडा ऊपर उठाना पड़ता है.....देखिये हमने अपने दोनों हाथ ऊपर करके पोस्ट को उठाया है...
फोटो दमदार है जी....पांय लागू

Kaotuka का कहना है

मुझे यह समझ में नहीं आता कि जब तिरंगा श्रद्धा की वस्तु है तो उसे उसके मंदिर में क्यों नहीं रहने देते. कुछ को जूनून चढा और ले लिए अधिकार तिंरगा फहराने का. अब कुछ को जूनून चढा है हर चीज को देशी बनाने का. तिरंगा लगा कर भी वही करने की कोशिश की जाती है.

ये क्या है कि सीढियों पर कोई थूके नहीं इसीलिए हनुमान जी की तस्वीर वाला टाइल लगा दिया, गाडी के डैशबोर्ड पर उन्हें बिठा दिया कि हम दायें चलायें कि बाएँ, ऐसे चलायें कि वैसे अब आप ही संभालो. वैसे ही अब हम आँए बोले की बाँय तिरंगा लगा दिया कि हम देशभक्त हैं.

Anil का कहना है

डागदर साहेब, आपने तो तिरंगे पर पूरी चिट्ठा-चर्चा ही कर डाली! "माताजी" का वह चित्र कई सालों से देख रहा हूँ, इसके बारे में किसी पत्रकार ने उनसे पूछा था, तो उन्होंने कहा "कोई भक्त तिरंगे को मेरे कदमों में डाल गया होगा।" - कदमों में यदि कोई बम डाल जाये तो तुरंत भाग खड़ी होंगी, लेकिन गिरंगा पड़ा है तो पड़ा रहे।

खैर... ...

कुश का कहना है

तिरंगा किसे लटकाना है? सब अपने अपने ब्लॉग का लिंक साथ में दे रहे है. खुद की पी आर बढ़वाने के लिए तिरंगा दे दिया..

आजकल विजुअल मर्चेनडाइज़िंग का ही तो ज़माना है.. हर हाल में सबको कमाना है

डा. अमर कुमार का कहना है

धन्यवाद मित्र,
आप सामने आये तो, सही..
भले ही चोरी चोरी चुपके चुपके वाया.. गली नं. जी-मेल इनबाक्स ?यह साझा है यहाँ ,बरास्ते ई-मेल
vinayprajapati@msn.com to me
show details 12:29 PM (4 hours ago)
Reply
from vinayprajapati@msn.com
to c4blog@gmail.com
date Thu, Apr 23, 2009 at 12:29 PM
subject India Flag, It's postion and Your Misconception
mailed-by msn.com
hide details 12:29 PM (4 hours ago)

Reply
प्रिय अमर कुमार जी,
झण्डे की बात को पीछे छोड़ते हुए पहले तो मैं आपके सज्ञान में यह बात लाना आवश्यक समझता हूँ कि मुझे किसी की सहानुभूति या सहायता की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि मैं स्वयं इतना सक्षम हूँ कि अपनी सहायता स्वयं कर सकता हूँ। अब झण्डे की बात का पर उपजे प्रश्न का उत्तर यह है कि अगर आप को HTML code का ज्ञान है और आपको English भी आती है तो यह बात बहुत अच्छी है। लेकिन मैं इस बात पर ज़ोर देना चाहूँगा की भाषा चाहे जो भी हो उसका पूरा ज्ञान आवश्यक है। अगर आपने कविता जी को मेरा लिखा मेल पढ़ ही लिया है तो आपने यह भी पढ़ा होगा कि मैंने z-index position का भी ज़िक्र किया है। आपको कितनी डेस्कटाप स्तिथियों का पता है मुझे नहीं मालूम लेकिन आपको z-index पर अपनी जानकारी अवश्य बढ़ानी चाहिए। जहाँ तक देश प्रेम की बात है तो शायद आपको अपने पे गुमाँ है कि आपसे ज़्यादा देशभक्ति का जज़्बा किसी में भी नहीं है, शायद यह आपका overconfidence है।
अगर आप z-index पर अपना ज्ञान बढ़ा लेते हैं और फिर भी आपको कोई भी शंका रह जाती है तो मुझे पत्र अवश्य लिखें और हाँ मुझे आपकी तरह अपने ज्ञान का प्रचार करने की कोई अवश्यकता नहीं है कि मैं क्या हूँ और मुझे किस विषय में कितना ज्ञान है। यदि आपको मेरा कोई तकनीकि लेख पसंद आता है और आप टिप्पणी करते हैं तो अच्छी बात है लेकिन यदि आप को कुछ भी उपयोगी नहीं लगता है तो मुझे कोई समस्या नहीं है लेकिन बेवजह की बातों पर उलझना और अपना और मेरा समय नष्ट करना मुझे कतई पसंद नहीं है। आगे यदि आप कोई उचित प्रश्न करेंगे तभी उत्तर करूँगा अन्यथा नहीं। मुझे अपने ब्लॉग पर टिप्पणियों की कोई लालसा नहीं है कि मैं हर किसी को ख़ुश करता फिरूँ।

@ अब क्या मिसाल दूँ, मैं तुम्हारे ज़वाब की.. .. .. बस यही कि
आदरणीय प्रजापति जी,
डाबर का च्यनप्राश बड़ा मुफ़ीद है,
इससे 51 साल के ज़वान को 30 साल का बूढ़ा नहीं दिखता
क्योंकि पाठे और साठे में कोई तुक ही नहीं बैठता
पर यदि बैठाने का प्रयास करें,
तो, असंभव भी नहीं है

काश, मैं नीचे कोने के लिये "display:scroll;position:fixed;bottom:5px; right:5px;" से हट कर "display:scroll;position:fixed;top:5px;right:5px;" भी सोच सकता.. और जीवन में कुछ और भी अधिक मौलिक कर पाता .. काश !!
भाग्य पर किसका वश है ?

लवली कुमारी / Lovely kumari का कहना है

chhoti si baat thi ..jaane kyon log ahankari ho jate hain

सतीश पंचम का कहना है

तक धिन...तक धा...तक धा धा :)

अनूप शुक्ल का कहना है

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा!

Arvind Mishra का कहना है

यह कंकड़ तो निशाने पर लगा है डागदर !

गौतम राजरिशी का कहना है

जहे-नसीब डाक्टर साब, हम आपके मित्रों की फ़ेहरिश्त में शुमार कर लिये गये हैं....
किंतु इस तिरंगे की बाबत तो आपकी टिप्पणी से संबधित मेरे विचार वही हैं। ये तो मन की श्रद्धा की बात है। अंदर से भले ही हम इस तिरंगे के बारे में क-ख न सोचें लेकिन ब्लौग-पोस्ट पर कहाँ लगने से इसका अपमान होगा या नहीं होगा- थोडी दूर की कौड़ी सी लगी मुझे।
बाकि "मैं होश में हूँ हजारों कटारों के आगे, तुम्हारे हाथ का कंकड़ निराश करता है" इन दो मिस्‍रों पर हम बिछ गये हैं

रौशन का कहना है

कुछ पढने के लिए बड़ी मेहनत करनी पड़ जा रही है कहीं बिलकुल छोटा फॉण्ट कहीं बड़ा
थोडा हम पढने वालों का भी ख्याल रखिये न

ताऊ रामपुरिया का कहना है

बहुत शानदार कट पेस्टिय लेखन. प्रणाम गुरुदेव.

रामराम.

अभिषेक ओझा का कहना है

शुकुल जी सही कहते हैं... मैं हर पोस्ट पढ़ के चुपके से निकल लेता हूँ. बहुत कम पल्ले पड़ता है :-)

Shama का कहना है

Theekse bina padhe tippanee nahee dena chahtee...subahke 4 bajnewale hain..
Aapkee tippanee padhee..
Meree malika pooree ho gayee hai, balki aapne 4thee kadeepe tippaneebhee dee thee..7 kadiyonme samapan ho gaya,,ab doosaree shuru kee hai," aisa kyon hota hai?....
link detee hun
http//aajtakyahatak-thelightbyalonelypath

Behad pareshaniyonke daurse guazar rahee thee/hun..usme URL kee gadbadee kar dee...I hopr u r able to open the correct link...waise aapko "lalitlekh", sansmaran","kahanee","baagwanee" tatha any kalake blogsbhee shayad pasand aayen..jaiseki,"fiber art", "chindichidi",( isme kaafee kifayatee recyclingpe zor diya hai).
Aapkee tippanee sachhe manse hotee hai, jahan sudharkee zaroorat hotee hai,aap batate hain..mai in tippaniyonkee behad qadr kartee hun..
Nhaee mai lagatar lekhanme wyast thee..."lizzat" pebhee likha hai... paridhan","dharohar" adi...

विनय का कहना है

आप यह तो बताना ही भूल गये कि मैंने Desktop के चारों कोनों के लिए कोड दिए थे... :) वैसे अच्छा लिख लेते हैं। टिप्पणियाँ पाने और अपना क़द ऊँचा रखने का इससे बेहतर रस्ता किसी के पास नहीं। बस दूसरे को नीचा दिखाओ तो अपनी कमीज़ का कालर ऊपर रहता है। क्यों मियां दुरुस्त कहा ना!

डा. अमर कुमार का कहना है

गलती मान लेना, सबसे बड़ा प +रा+ य+ श+ चि+ त यानि कि प्रायश्चित होता है ,
आप हैं, कि अड़े जा रहे हैं ! यह ठीक है, कि आप बाहर आज़ाद घूम रहे हैं, लेकिन मियाँ जी जूती भी पहना करते हैं । जब तक आप अपने बीमार मन का इलाज़ नहीं करवा लेते, यह जूती यदा कदा प्रयोग कर सकते हैं ! सिर की अदला बदली होती रहेगी, पर उसकी नौबत न ही आयेगी । आपसे ज़्यादा छँटॆ हुये मेरे लौंडे लखनऊ में घूम रहे हैं, जो मेरे दिमाग घूम जाने पर मुझे उपकृत करने को उत्सुक हैं, प्रजापति.. तुम्हारा आई.पी. बैन कर रहा हूँ ! इतने से सँतोष न हो, तो साइट लाक करवा दूँ ? होश में रहो.. तिरँगे को अपमानित करके कालर ऊँची करने जैसे जनखे भ्रम से अब दूर भी हो जाओ । इडियट !!!!!!!
تُم تو شںہشاہ ئے شایری ہو، تُمہیں میرے لِکھنے سے کیا فرق پڑتا ہے ؟
یا اُسکی بھی پول پٹّی کھُلوانا چاہتے ہو، مُرجھایا چاںد، گرجتا بادل اؤر سُوکھا پتّا کہیں کا ۔ ناماکُول !!

डा. अमर कुमार का कहना है

यह सादी जुबान की इबारते हैं, शेर ओ शायरी की लफ़्फ़ाज़ी नहीं, सो एक बार दुबारा पढ़ लो.. शायर शिरोमणि !
تُم تو شںہشاہ ئے شایری ہو، تُمہیں میرے لِکھنے سے کیا فرق پڑتا ہے ؟
یا اُسکی بھی پول پٹّی کھُلوانا چاہتے ہو، مُرجھایا چاںد، گرجتا بادل اؤر سُوکھا پتّا کہیں کا ۔ ناماکُول !!

लगे हाथ टिप्पणी भी मिल जाती, तो...

आपकी टिप्पणी ?

जरा साथ तो दीजिये । हम सब के लिये ही तो लिखा गया..
मैं एक क़तरा ही सही, मेरा वज़ूद तो है ।
हुआ करे ग़र, समुंदर मेरी तलाश में है ॥

Comment in any Indian Language even in English..
इन पोस्ट को चाक करती धारदार नुक़्तों का भी ख़ैरम कदम !!

Please avoid Roman Hindi, it hurts !
मातृभाषा की वाज़िब पोशाक देवनागरी है

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यह अपना हिन्दी ब्लागजगत, जहाँ थोड़ा बहुत आपसी विवाद चलता ही है, बुद्धिजीवियों का वैचारिक मतभेद !

शुक्र है कि, सैद्धान्तिक सहमति अविष्कृत हो जाते हैं, और यह ज़्यादा नहीं टिकता, छोड़िये यह सब, आगे बढ़ते रहिये !

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