जो इन्सानों पर गुज़रती है ज़िन्दगी के इन्तिख़ाबों में / पढ़ पाने की कोशिश जो नहीं लिक्खा चँद किताबों में / दर्ज़ हुआ करें अल्फ़ाज़ इन पन्नों पर खौफ़नाक सही / इन शातिर फ़रेब के रवायतों का  बोलबाला सही / आओ, चले चलो जहाँ तक रोशनी मालूम होती है ! चलो, चले चलो जहाँ तक..

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08 January 2009

अपनी उनके संग सुरक्षित ड्राइविंग … …

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मोबाइल के उपयोग एवं ड्राइविंग के समय टेप से छेड़छाड़ ( डा. अनुराग Dont tell anyone) के बाद आपकी उनकी चटर चटर ही एक्सीडेन्ट का एक और मुख्य कारण है ! अपुन के उल्हासनगर के कारग़ुज़ारों ने अनोखा सीट-बेल्ट इज़ाद किया है, जी हाँ.. ख़ालिस Made in USA ! बगल में बैठी ख़ूबसूरत दुर्घटना से आपका कान औ’ ध्यान सुरक्षित ..  फिर अगली कोई अनहोनी तो अन + होनी ही समझिये !Wink पेटीकोट सरकार मान्यता प्राप्त है यह !

b82इसकी अग्रिम बुकिंग धड़ल्ले से चल रही है, संपर्क करें – अभिषेक ओझा,  अथवा श्री ताऊ रामपुरिया इंदौर वाले

8 टिप्पणी:

शाश्‍वत शेखर का कहना है

दाँव अगर उल्टा पड़ा तो...............

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi का कहना है

खतरनाक है, चालक को नींद आने लगी तो जगाने का साधन तो बेल्ट में बंद है।

Arvind Mishra का कहना है

यह इक्कीसवी सदी का महानतम आविष्कार है !

Tarun का कहना है

दिनेशजी की बातों में भी दम है, इस बेल्ट को लगाने के बाद जगाने का साधन बहुत कम है

कुश का कहना है

क्यू गड़बड़ करवा रहे है डा. साहब... अनुराग जी क़ी तो हम पर इनायत ही तभी होती है जब वो गाड़ी चलाते है.. और रही बात इस बेल्ट क़ी.. तो अपनी श्रीमती जी को गाड़ी चलाने दिजिये उसके बाद ये समस्या नही रहेगी.. हम तो यही करते है..

Amit का कहना है

बहुत सही...

विनय का कहना है

पहले कई बार यह फोटू देख चुका हूँ लेकिन विवरण पढ़कर मज़ा आ गया। जब थीम खँगाल लें तो मुझे सूचित कर दे कि निष्कर्ष क्या रहा?

---मेरा पृष्ठ
गुलाबी कोंपलें

डॉ .अनुराग का कहना है

जे बात ठीक नही है गुरुदेव ... हम बाहर थे ओर आपने एक नया शगूफा छोड़ दिया .वैसे द्रिवेदी जी का कहना ठीक है की जगायेगा कौन ???????खैर इसके मुनाफे में कुछ प्रतिशत हमारी ओर ढलका देना ....नया मोबाइल ले लेगे....क्यों कुश भाई ठीक है न !

लगे हाथ टिप्पणी भी मिल जाती, तो...

आपकी टिप्पणी ?

जरा साथ तो दीजिये । हम सब के लिये ही तो लिखा गया..
मैं एक क़तरा ही सही, मेरा वज़ूद तो है ।
हुआ करे ग़र, समुंदर मेरी तलाश में है ॥

Comment in any Indian Language even in English..
इन पोस्ट को चाक करती धारदार नुक़्तों का भी ख़ैरम कदम !!

Please avoid Roman Hindi, it hurts !
मातृभाषा की वाज़िब पोशाक देवनागरी है

Note: only a member of this blog may post a comment.

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यह अपना हिन्दी ब्लागजगत, जहाँ थोड़ा बहुत आपसी विवाद चलता ही है, बुद्धिजीवियों का वैचारिक मतभेद !

शुक्र है कि, सैद्धान्तिक सहमति अविष्कृत हो जाते हैं, और यह ज़्यादा नहीं टिकता, छोड़िये यह सब, आगे बढ़ते रहिये !

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